
आरव की पहाड़ी गांव में चाय की छोटी दुकान है, जो सबकी मीटिंग पॉइंट है।
गांव में एक दिन अचानक नई डॉक्टर आती है — अदिति।
पहली मुलाकात थोड़ी बहस भरी होती है: अदिति चाय को अनहेल्दी कहती है, आरव उसे “दिल की दवा” कहता है।
अदिति धीरे-धीरे गांववालों का दिल जीतने लगती है।
आरव और अदिति की बातचीत बढ़ती है। अदिति रोज़ चाय की दुकान पर आकर बच्चों को फर्स्ट एड सिखाती है।
एक दिन बारिश में अदिति का स्कूटर फिसलता है, आरव उसे बचाता है। वहीं से रिश्ते में नजदीकियां शुरू होती हैं।
गांव का सरपंच रघु चौधरी, अदिति को हटाना चाहता है क्योंकि वो गांव की असलियत उजागर कर रही होती है (बिना दवा, भ्रष्टाचार, नकली रिपोर्टिंग)।
वो आरव को पैसों का लालच देता है कि अदिति से दूरी बना ले — लेकिन आरव मना कर देता है।
रघु झूठ फैलाता है कि आरव अदिति से शादी करना चाहता है ताकी गांव छोड़ सके।
अदिति को गुस्सा आता है, वो पैकिंग शुरू कर देती है।
दादी अम्मा बीच में आती हैं और अदिति को सच्चाई बताती हैं।
गांववाले मिलकर रघु के खिलाफ जाते हैं, और हेल्थ सेंटर को ठीक कराने की मांग करते हैं।
अदिति और आरव के बीच सुलह होती है — अदिति कहती है: “चाय सिर्फ दिल नहीं, रूह भी जोड़ती है…”
कहानी एक प्यारी सी शादी और हेल्थ कैंप के उद्घाटन पर खत्म होती है — अदिति गांव में रह जाती है, आरव उसके साथ मिलकर एक “हर्बल चाय+हेल्थ कैफे” खोलता है।
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